
बात २००७ की है जब मैं पटना में नया नया रहना शुरू किया था उस समय कुछ युवा साथी बड़े ही जोश के साथ समर नाम की पत्रिका जो द्विभाषी थी उसे शुरू किए थे, कुछ समय बाद जब मानसून आया तो उसी वर्ष २००७ में बेगुसराय जिले में गंडक नदी का बांध बसही नामक स्थान पर टूट गया| भयानक बाढ़ आ गयी| समर से जुड़े अनेक साथी उस समय बेगुसराय कूच कर गये| दोस्तों से मदद जुटा कर वे लोगों के बीच राहत करते रहे| एक समय तक उनकी होने वाली चर्चाओं में मैं भी भागीदार रहता था| बाद में समर को लम्बे समय तक कार्य करने के उद्देश्य से उन सभी साथियों से इसे ट्रस्ट का स्वरूप दिया| समर ट्रस्ट आज पटना की शहरों में अनेक स्थानों पर झुग्गियों में रहने वाले बच्चों को शिक्षा देने का कार्य कर रहा है तो स्लम के लोगों के बुनियादी सवाल है उनका पलायन पर अध्ययन कर पुस्तक भी निकाला है| शहरों तक मात्र सिमित नही करते हुए इसके साथी अपना विस्तार करते हुए शहर के आसपास के गाँवो जैसे नेवड़ा व अन्य जगह पुस्तकालयों की स्थापना कर, उसे बड़े ही सलीके से संचालित कर रहे है तो समर के युवा साथी अनेक जगह क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन कर रहे है| इन सभी के माध्यम से छात्रों-युवाओं के साथ शिक्षा के साथ साथ आपसी सम्वाद और मेल जोल बढ़ाना है ज्सिकी बुनियाद पर ही नफरत, भ्रम, हिंसा, और अज्ञानता को खत्म किया जा सकता है|
समर के संचालन में सबकी भागीदारी और लोकतान्त्रिक तरीके से सभी निर्णयों का लिए जाना इसकी खासियत है| वाकई में इसतरह की संस्था और सन्गठन समाज को आगे बढ़ाने में बहुत जिम्मेवारी निभा रहे है|
महेंद्र यादव
राष्ट्रिय संयोजक मंडल
जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय (NAPM)
